एक दौर था जब अरेंज मैरिज हुआ करती थी एक दूसरे को जानते तक नहीं थे फिर भी जीवन भर साथ निभाते थे , आजकल लोग पहले प्रेम करते है फिर प्रेम विवाह करते है असल में जो विवाह के बाद होना था वो विवाह से पहले ही हो गया विवाह के बाद नया करने को कुछ होता नहीं है
जब कोई अरेंज मैरिज करता है तो विवाह के बाद बीबी को छूना इतना आसान नहीं होता है क्योंकि एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते नहीं है पता नहीं क्या गलती हो जाए और साथी को बुरा लग जाए इसलिए बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है अपने साथी से मेल मुलाकात में
अगर प्रेम विवाह किया है तो विवाह के बाद ये फॉर्मेलिटी करने की आवश्यकता है नहीं सीधे गोद में गिर जाओ कोई हिचकिचाहट नहीं है पहले से ही एक दूसरे को इतना जानते है कि अब जानने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती है और आज ऐसा कुछ विशेष करना भी नहीं है जो पहले न किया हो इस लिए विवाह विवाह जैसा लगता ही नहीं है
अरेंज मैरिज में कई दिन दो एक दूसरे से शर्माने में ही निकल जाते है पहली रात भी खुल कर अपना व्यक्तिव प्रदर्शित नहीं कर सकते इंसान कोशिश करता है उसका व्यक्तिव धीरे धीरे सामने आए हर दिन अपने साथी के बारे में कुछ अच्छा जानने को मिलता है तो अच्छा लगता है नए नए होते है तो एक दूसरे का स्पर्श भी महसूस होता है कि साथी ने छुआ है उस स्पर्श को इंसान अपने जीवन में कभी नहीं भूलता है
इसी लिए अरेंज मैरिज लंबी चलती है क्योंकि एक दूसरे को समझने में ही हम दस बीस साल निकाल देते है जब दस बीस साल निकाल देते है तो एक दूसरे की आदत सी भी हो जाती है एक साथी थोड़ा बहुत क्रूर या हाथ चलाने वाला भी मिल जाए तो बस यही सोच के साथ निभा जाते है कि इतना समय गुजार दिया थोड़ा बहुत और बचा है वो भी गुजर ही जाएगा
जो लोग प्रेम विवाह करते है वो विवाह से पहले ही उस जीवन को ही लेते है जो जीवन एक शादी विवाह के बाद जीना चाहिए इसलिए विवाह के उपरांत वो विवाह विवाह जैसा नहीं रहता है उल्टा ऐसे लोगों को परेशानियां ज्यादा आ घेरती है क्योंकि इन्हें लगता है जीवन जीना प्रेम करने जितना आसान है सम्बन्ध बना लेने जितना आसान है
इन्हें लगता है विवाह के बाद जो सुख हमे मिल रहा है वो तो हम बिना विवाह के ही ले रहे थे हमे विवाह कर के खुद को इतनी जटिलता में क्यों डालना और ऐसे धीरे धीरे परस्पर एक दूसरे के प्रति प्रेम खत्म होता जाता है और जिम्मेदारियों मुसीबत लगने लगती है तब लगता है विवाह कर के फंस गए फिर यही प्रेमी अपने अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से इतना भागते है कि एक दिन
प्रेमी दूसरे प्रेमी को 36 टुकड़ों में काट कर फ्रिज में रख देता है कोई 15 टुकड़े कर के तीन एक का मसाला डालकर ड्रम में जमा देता है कोई हाथ पैर काट के सूटकेस में पैक कर के फेंक देता है तो कोई फांसी लगाकर इंसाफ की गुहार लगाता है जो समाज की चिंता नहीं करते है वो साथी को छोड़कर भाग जाते है जो समझदार होते है वो स्वेच्छा से तलाक ले लेते है कुछ लोग साथ तो रहते है मगर उनका जीवन नरक से भी गया गुजारा होता है
लोग अपनी मन मर्जी से शादी करते है फिर भी जीवन भर साथ नहीं दे पाते है और अधर में ही जीवन संकल्प तोड़ देते है आधुनिक होने का या पश्चिम सभ्यता कॉपी करके जीवन जीने का तरीका भारतीय सामाजिक तानाबाना बिखेर रहा है क्योंकि हम पश्चिम की सभ्यता तो अपना रहे है मगर हमें ये भी सोचना चाहिए कि हम लोगों का वो स्तर है क्या जो पश्चिमी लोगो का है ?