मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019
छोटी सी जिंदगी में बस छोटे से गम है
शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019
सियासत के गलियारों में ,कोलाहल बड़ा भारी है
वोट की खातिर कुछ लोगो ने,देश से की गद्दारी हैं
जो साध ले जन भावना, वो ही बड़ा व्यापारी है
लोकतंत्र के महा पर्व में जनता सब पर भारी है
चाहे जितना देश लूटलो ये भूंख न मिटने बाली है
काम करे कुछ ऐसा जिसमे सब की खुशहाली है
बुधवार, 3 अप्रैल 2019
न बांटो इस देश को हम पर ये अहसान रहने दो
न बांटो देश को हम पर ये अहसान रहने दो
अनेकता में एकता का बस एहसास रहने दो
जहाँ जान न्यौछावर करते हो देश पर सैनिक
उन सैनिकों का हौसला आसमान पर रहने दो
बहुत पुराना हुआ ये गरीबी हटाने का नाटक
अब में गरीबी में खुश हूं मुझे गरीब ही रहने दो
माना भूंख तोड़ देती है अच्छे अच्छो का हौसला
फिर हम टूटेंगे नही हमे बस आत्मनिर्भर रहने दो
हमे नही चाहिए स्वपनों का अमेरिका और पेरिस
मेरे हिंदुस्तान को तुम बस हिंदुस्तान ही रहने दो
सोमवार, 18 मार्च 2019
हम तुम्हे भूल जाँए ये मेरी फितरत नही है
हम तुम्हे भूल जाँए ये मेरी फितरत नही है
तुम हमको चाहो ये कोई जरूरी तो नही है
किसी की याद में उम्र काट देना ही प्रेम है
उम्र भर हम साथ रहे ये जरूरी तो नही है
मिल ही जाते हो तुम मेरे ख्यालो में अक्सर
हकीकत में मिलें हम ये जरूरी तो नही है
टूट पड़ता है मुझ पर तुम्हारी यादों दरिया
में भी तुम्हे याद आऊं ये कोई जरूरी तो नही है
रातो में देखे है हमने ये खामोश रातो के तारे
हर रोज चांद निकले ये कोई जरूरी तो नही है
शुक्रवार, 15 मार्च 2019
मंजिल तक पहुचना काफी नही ऐ जिंदगी
सफर के भी कुछ मायने निकलने चाहिए
बहुत उड़ते रहे है दुश्मनी के काले बादल
अब तो मोहब्बत के बादल बरसने चाहिए
क्यों देखते हो यूं शक की निगाहों से हमको
देर से ही सही मगर ये नजरिये बदलने चाहिए
मेरे हृदय में रहोंगे तुम हमेशा धड़कन बन कर
जब नाम लू में तेरा तो दिल धड़कना चाहिए
हर किसी को हक़ है प्यार करने का दोस्तो
जरूरी नही है कि दिल से दिल मिलना चाहिए
शनिवार, 9 मार्च 2019
काश तुमने अपनी कातिल निगाहों से देखा न होता
काश तुमने मुझे अपनी कातिल निगाहों से देखा न होता
तो में तुम्हारी मोहब्बत में इतना गिरा न होता
बुझा ही रहने देती तुम अपने मोहब्बत के चिराग को
कम से कम शमा की आग में परवाना जला तो न होता
में मानता हूं कुछ रिश्ता नही है तेरे मेरे दरम्यां में
फिर भी मेरी चाहत का एहसास तो किया होता
बड़ी ख्वाहिश रही मेरी तुम्हे जी भर देखे कभी
काश मेरा ये सपना कभी पूरा तो हुआ होता
बड़ी तकलीफे देती है गुजरी हुई यादें तुम्हारी
काश में तन्हा ही सही उम्र भर के लिए सोया ही हुआ होता
सोमवार, 25 फ़रवरी 2019
कहा भूलता है वो तुम्हारा मध्धम सा मुस्कराना
कहा भूलता है वो तुम्हारा मध्धम सा मुस्कराना
वो प्यारी सी नजरे झुका के हल्का सा सरमाना
एक मुद्दत बीत गई खोए ख्यालातों में तुम्हारे
काश लौट आये वो बचपन का गुजरा जमाना
कुछ न कुछ तो बांकी रह गया है तेरे मेरे दरम्यां
यूँही ही नही जलता है आग में मुझ सा परवाना
भले ही हो तुम्हारे पास हमे भूलने हजारों बहाने
में तो रखता हूं पास तुम्हारी यादों का खजाना
बुधवार, 20 फ़रवरी 2019
तेरे दर पर खड़े एहसास मेरे
तेरे दिल के दर पर कुछ इस तरह खड़े रहे एहसास मेरे
जैसे कोई अमीर आदमी निकल जाता है गरीब को देखकर
बुधवार, 13 फ़रवरी 2019
झूँठ और बेईमानी
झूँठ और बेईमानी उस पिंजरे की तरह है जिसमे छोटा सा रोटी का टुकड़ा डाल कर चूहे को फांसा जाता है
इसी तरह हम सब जानते है झूँठ और बेईमानी से एक न एक दिन फसेंगे फिर भी हम ये रिस्क लेते रहते है
मंगलवार, 8 जनवरी 2019
कोई न समझे जज्बातों को आशाओ की भी कोई किरण नही
कोई न समझे जज्बातों को आशाओ की भी किरण नही
उच्च कोटि का है स्वार्थ इनका जिनका कोई छोर नही
कैसे मिटती इक इक आशा जिसका होता शोर नही
पल पल बढ़ती खामोशी में पहले बाला शोर नही
क्या कुछ पाया क्या कुछ खोया अब इसका कोई ज्ञान नही
चाहे करे कोई बात प्रेम की होता अब विश्वास नही
एक जो हम थे दूजे तुम थे लगते बिल्कुल गैर नही
अब बात तुम्हारी क्या करते जब खुद पर ही इतवार नही
सबक मिला मुझे उन लोगो से जिनमे था कोई गैर नही
छोड़ चले थे राह में मुझको फिर भी रहा कोई शिकवा नही
पाक के नारे लगे रैलियों में ये काँग्रेस गद्दार है
पाक के नारे लगे रैलियों में ये कांग्रेस गद्दार है
मीडिया को झूँठा बोले खुद बड़े मक्कार है
गंगाजल इन्हें पानी लगता राहुल मूत्र वरदान है
भारत माता के नारे रोके बोलें पाकिस्तान है
गद्दारो का करे समर्थन और भगवा आतंकवाद है
धर्म के नाम पे देश को बांटा फिर ये महान है
सरसठ साल किया शासन बस इनको यही गुमान है
मांग सबूत जवानों से कांग्रेस ने किया अपमान है
वोट मांगते पाकिस्तान में चुनाव तो हिन्दुस्तान है
देश विदेश में करते कलंकित जो भारत भूमि महान है
सोमवार, 7 जनवरी 2019
भूल गया में सारा जमाना बस याद तुम्हारी बनी रही
भूल गया में सारा जमाना बस याद तुम्हारी बनी रही
कैसे बतलाऊ में तुमको दिल की धड़कन शोला सबनम बनी रही
भूल हुई जो तुमको चाहा जाने क्या मजबूरी रही
खड़ी जिंदगी राख ढेर पर फिर भी सांसे थमी रही
कैसे कटी जिंदगी मेरी इसका तुम्हे एहसास नही
भूल गया में सूरत तेरी बस आंखों में सीरत तेरी बनी रही
पहला प्यार था पहली चाहत पहली सी ही बात रही
यही वजह थी शायद इसमे जो तेरी यादें बनी रही
किसे चेन है किसे सुकूँ है मोहब्बत के गलियारों में
पल पल कटती तन्हाई में आशाओ की किरण बनी रही
इच्छाधारी है राहुल अपना भेष कई धर जाता है
कांग्रेस में आया सिद्धू जो पाक को बाप बताता है
ऐसी मानसिकता कांग्रेस की जो मोदी को चोर बताता है
कांग्रेस ने दिया लोन जिसे ले माल्या भाग जाता है
करते है सडयंत्र ऐसे जिस से देश स्थिर हो जाता है
दस सालों में देश बेच दिया जबाब कोई नही आता है
घोटालो की खुली लिस्ट जब तब मन मोहन भी मौन हो जाता है
बात ये करते लोकतंत्र की जो इनमे जाने कहा खो जाता है
गाय काटते बीच सड़क पर और सब को खिलाया जाता है
ऐसा नशा चढ़ा सत्ता का राम को काल्पनिक बताते है
वही पप्पू आज हर मंदिर में मत्था टेकता पाया जाता है
इच्छा धारी है राहुल अपना भेष कई धर जाता है
कभी वो पहने पगड़ी भगवा कभी मौलाना बन जाता है
आलू से वो बनवाता सोना कभी भेल से मोबाइल बनाता है
जहाँ जहाँ पड़ते है कदम वहाँ खाट कांग्रेस की खड़ी करवाता है
तुम्हे जब खोया जीना मुश्किल सा हो गया
जब तुम्हे खोया तो जीना मुश्किल सा हो गया
दोबारा तुम्हे देखु बस एक सपना सा हो गया
एक बात दिल मे हमेशा खलती रही उम्र भर यूं
किसी से प्रेम करना मानो कोई गुनाह सा हो गया
माना मेरा प्रेम करना तुमसे एक तरफा ही रहा हो
फिर भी लोगो की नजरो में एक तमाशा सा हो गया
कटने को तो काटी मेने उम्र अपनी फिर भी
लगा ऐसा की तेरा मिलना अधूरा सा रह गया
मिल गई होंगी खुशियां तुम्हे मेरे जाने वाद
मेरे हिस्से में तो बस पतझड़ सा रह गया
न सो सका उम्र भर एक पल भी सुकून से
खो गए हो तुम कही और में तुम्हे ढूंढता सा रह गया
मन जो कही प्रोजेक्टर होता
मन जो कही प्रोजेक्टर होता
तो तेरे ऐब दिन में तो छुप जाते
जैसे ही होती रात अंधेरी तो
खुद ही एक्सपोज हो जाते
दिन दिन भर जो है कसमे खाते
होते ही शाम शर्मो शर्म मर जाते
कितना झूंठ बोलता है हर इंसान
खुलते भेद और हर भ्रम मिट जाते
खेल रहे है कैसे कैसे लोग जज्बातों से
देखता हर कोई और दंग रह जाते
अंदर से जो टूटे है चेहरे पर शिकन नही
अंदर की बाते बाहर देख लोग आह भर जाते
अच्छा हुआ जो मन प्रोजेक्टर नही
वरना लोग मुँह छुपाने कहा जाते