शनिवार, 11 जुलाई 2020

ये जरूरी नही है कि हर गुनाह की सजा मिले

ये जरूरी नही है कि हर गुनाह की सजा मिले
कुछ  बातें में भी रख लू इतना तो समय मिले

जज बन के फैसला कर दो ये कहा तक ठीक है
सजा पहले ये हक है मेरा,मुझे भी एक मौका मिले

हो सकता है मुझे समझने में तुम से कही भूल हुई हो
ऐसे कौन सजा देता है, जिस से तुम्हारा मन न मिले

शक के दायरे में लाखों जिंदगियां हो जाती है तबाह
दुआ करो ऊपर बाले से ऐसा भाग्य किसी को न मिले

मेने देखी है बदकिस्मती को, अपनी हस्तरेखाओं में
सब छूटता ही जा रहा है,पता नही दोबारा मिले न मिलें

ये भी एक दौर है वो भी एक दौर था

ये भी एक दौर है वो भी एक दौर था
मंजिल तो पास थी रास्ता ही दूर था

देखती रहती थी जिनको आंखे दूर से
उन्हें निहारने का मजा ही कुछ और था

अब अपनी गिनती होने लगी है औरों में
अपना कहने का वो दौर ही और  था

न जाने कब पासे पलट गए जिंदगी के
एक दिन जुदा होना भी शायद तय था

चलो अब रास्ते बदल लेते है हम दोनो
जो भी हुआ उसका तुम्हे क्या मलाल था