मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

तेज आंधियां और अंधकार से धुंधले हुए शहर

तेज आंधियां और अंधकार से धुंधले हुए शहर
यहाँ सब अजनबी है किसी को न किसी की खबर

एक उदासी आंखों में  न मुस्कराहटें चेहरों पर
गांव बाले आये तो देखे कैसे होते है ये शहर

आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित 
फिर भी गुनाह रोकने में कितने बेबस है शहर

कैमरों से अच्छी है हमारे गांव के बुजुर्गों की नजर
उनके सामने भरते है पानी तुम्हारे ये आधुनिक शहर

उड़ती हुई धूल ने छीन ली है खूबसूरती पेड़ो की
दौड़ती हुई गाड़ियों के धुएं ने झुलसा दिए है शहर

दूध से लेकर पानी तक पन्नियों में बेचे जा रहे है
सुख की चाहत में दर्द का अंबार ओढ़ रहे है शहर