मंगलवार, 8 जनवरी 2019

कोई न समझे जज्बातों को आशाओ की भी कोई किरण नही

कोई न समझे जज्बातों को आशाओ की भी किरण नही
उच्च कोटि का है स्वार्थ इनका जिनका कोई छोर नही

कैसे मिटती इक इक आशा जिसका होता शोर नही
पल पल बढ़ती खामोशी में पहले बाला शोर नही

क्या कुछ पाया क्या कुछ खोया अब इसका कोई ज्ञान नही
चाहे करे कोई बात प्रेम की होता अब विश्वास नही

एक जो हम थे दूजे तुम थे लगते बिल्कुल गैर नही
अब बात तुम्हारी क्या करते जब खुद पर ही  इतवार नही

सबक मिला मुझे उन लोगो से जिनमे था कोई गैर नही
छोड़ चले थे राह में मुझको फिर भी रहा कोई शिकवा नही

पाक के नारे लगे रैलियों में ये काँग्रेस गद्दार है

पाक के नारे लगे रैलियों में ये कांग्रेस गद्दार है
मीडिया को झूँठा बोले खुद बड़े मक्कार है

गंगाजल इन्हें पानी लगता राहुल मूत्र वरदान है
भारत माता के नारे रोके बोलें पाकिस्तान है

गद्दारो का करे समर्थन और भगवा आतंकवाद है
धर्म के नाम पे देश को बांटा फिर ये महान है

सरसठ साल किया शासन बस इनको यही गुमान है
मांग सबूत जवानों से कांग्रेस ने किया अपमान है

वोट मांगते पाकिस्तान में चुनाव तो हिन्दुस्तान है
देश विदेश में करते कलंकित जो भारत भूमि महान है

सोमवार, 7 जनवरी 2019

भूल गया में सारा जमाना बस याद तुम्हारी बनी रही

भूल गया में सारा जमाना बस याद तुम्हारी बनी रही
कैसे बतलाऊ में तुमको दिल की धड़कन शोला सबनम बनी रही

भूल हुई जो तुमको चाहा जाने क्या मजबूरी रही
खड़ी जिंदगी राख ढेर पर फिर भी सांसे थमी रही

कैसे कटी जिंदगी मेरी इसका तुम्हे एहसास नही
भूल गया में सूरत तेरी बस आंखों में सीरत तेरी बनी रही

पहला प्यार था पहली चाहत पहली सी ही बात रही
यही वजह थी शायद इसमे जो तेरी यादें बनी रही

किसे चेन है किसे सुकूँ है मोहब्बत के गलियारों में
पल पल कटती तन्हाई में आशाओ की किरण बनी रही

इच्छाधारी है राहुल अपना भेष कई धर जाता है

कांग्रेस में आया सिद्धू जो पाक को बाप बताता है
ऐसी मानसिकता कांग्रेस की जो मोदी को चोर बताता है

कांग्रेस ने दिया लोन जिसे ले माल्या भाग जाता है
करते है सडयंत्र ऐसे जिस से देश स्थिर हो जाता है

दस सालों में देश बेच दिया जबाब कोई नही आता है
घोटालो की खुली लिस्ट जब तब मन मोहन भी मौन हो जाता है

बात ये करते लोकतंत्र की जो इनमे जाने कहा खो जाता है
गाय काटते बीच सड़क पर और सब को खिलाया जाता है

ऐसा नशा चढ़ा सत्ता का राम को काल्पनिक बताते है
वही पप्पू आज हर मंदिर में मत्था टेकता पाया जाता है

इच्छा धारी है राहुल अपना भेष कई धर जाता है
कभी वो पहने पगड़ी भगवा कभी मौलाना बन जाता है

आलू से वो बनवाता सोना कभी भेल से मोबाइल बनाता है
जहाँ जहाँ पड़ते है कदम वहाँ खाट कांग्रेस की खड़ी करवाता है

तुम्हे जब खोया जीना मुश्किल सा हो गया

जब तुम्हे खोया तो जीना मुश्किल सा हो गया
दोबारा तुम्हे देखु बस एक सपना सा हो गया

एक बात दिल मे हमेशा खलती रही उम्र भर यूं
किसी से प्रेम करना मानो कोई गुनाह सा हो गया

माना मेरा प्रेम करना तुमसे एक तरफा ही रहा हो
फिर भी लोगो की नजरो में एक तमाशा सा हो गया

कटने को तो काटी मेने उम्र अपनी फिर भी
लगा ऐसा की तेरा मिलना अधूरा सा रह गया

मिल गई होंगी खुशियां तुम्हे मेरे जाने वाद
मेरे हिस्से में तो बस पतझड़ सा रह गया

न सो सका उम्र भर एक पल भी सुकून से
खो गए हो तुम कही और में तुम्हे ढूंढता सा रह गया

विचार

दुनिया मे कुछ पाना बिल्कुल मुश्किल नही है

बस उसे पाने इच्छा शक्ति दृढ़ होनी चाहिए

मन जो कही प्रोजेक्टर होता

मन जो कही प्रोजेक्टर होता
तो तेरे ऐब दिन में तो छुप जाते

जैसे ही होती रात अंधेरी तो
खुद ही एक्सपोज हो जाते

दिन दिन भर जो है कसमे खाते
होते ही शाम शर्मो शर्म मर जाते

कितना झूंठ बोलता है हर इंसान
खुलते भेद और हर भ्रम मिट जाते

खेल रहे है कैसे कैसे लोग जज्बातों से
देखता हर कोई और दंग रह जाते

अंदर से जो टूटे है चेहरे पर शिकन नही
अंदर की बाते बाहर देख लोग आह भर जाते

अच्छा हुआ जो मन प्रोजेक्टर नही
वरना लोग मुँह छुपाने कहा जाते