जब तुम्हे खोया तो जीना मुश्किल सा हो गया
दोबारा तुम्हे देखु बस एक सपना सा हो गया
एक बात दिल मे हमेशा खलती रही उम्र भर यूं
किसी से प्रेम करना मानो कोई गुनाह सा हो गया
माना मेरा प्रेम करना तुमसे एक तरफा ही रहा हो
फिर भी लोगो की नजरो में एक तमाशा सा हो गया
कटने को तो काटी मेने उम्र अपनी फिर भी
लगा ऐसा की तेरा मिलना अधूरा सा रह गया
मिल गई होंगी खुशियां तुम्हे मेरे जाने वाद
मेरे हिस्से में तो बस पतझड़ सा रह गया
न सो सका उम्र भर एक पल भी सुकून से
खो गए हो तुम कही और में तुम्हे ढूंढता सा रह गया
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