ये जरूरी नही है कि हर गुनाह की सजा मिले
कुछ बातें में भी रख लू इतना तो समय मिले
जज बन के फैसला कर दो ये कहा तक ठीक है
सजा पहले ये हक है मेरा,मुझे भी एक मौका मिले
हो सकता है मुझे समझने में तुम से कही भूल हुई हो
ऐसे कौन सजा देता है, जिस से तुम्हारा मन न मिले
शक के दायरे में लाखों जिंदगियां हो जाती है तबाह
दुआ करो ऊपर बाले से ऐसा भाग्य किसी को न मिले
मेने देखी है बदकिस्मती को, अपनी हस्तरेखाओं में
सब छूटता ही जा रहा है,पता नही दोबारा मिले न मिलें
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