सियासत के गलियारों में,कोलाहल बड़ा भारी है
वोट की खातिर कुछ लोगो ने,देश से की गद्दारी हैं
वोट की खातिर कुछ लोगो ने,देश से की गद्दारी हैं
चुनाव पर्व है लोकतंत्र का,सबकी अपनी तैयारी है
जो साध ले जन भावना, वो ही बड़ा व्यापारी है
जो साध ले जन भावना, वो ही बड़ा व्यापारी है
जो सब की बात करेगा उस से अपनी यारी है
लोकतंत्र के महा पर्व में जनता सब पर भारी है
लोकतंत्र के महा पर्व में जनता सब पर भारी है
किसने लुटा देश हमारा किसकी ये मक्कारी है
चाहे जितना देश लूटलो ये भूंख न मिटने बाली है
चाहे जितना देश लूटलो ये भूंख न मिटने बाली है
क्यो शक किया सेना पर जिसके हिस्से रखबाली है
काम करे कुछ ऐसा जिसमे सब की खुशहाली है
काम करे कुछ ऐसा जिसमे सब की खुशहाली है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें