शनिवार, 22 मार्च 2025

जब महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी ने संविधान दिवस पर जजों से की भावुक करने वाली अपील

27 नवंबर 2022 को महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी ने संविधान दिवस के दिन देश के जजों को संबोधित करते हुए बड़ी ही मार्मिक अपील की थी और लास्ट में कहा था में आप सब पर छोड़ती हूं आप वो भी समझिए जो में कहना नहीं चाहती 

असल में लास्ट में जो महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी ने जो कहा पूरी स्पीच का सार उन्हीं वक्तव्यों में था कुछ न कह कर उन्होंने सब को कुछ कह दिया था ये जो मौन शब्द होते है बड़े ही गहरे होते है इन्हें समझना इतना भी कठिन नहीं है अगर तुमने अपने आत्मा को बेचा न हो तो 

किसी महिला की छाती को स्पर्श करना जबरजस्ती उसे खींच कर पुलिया के नीचे ले जाना फिर उसका नाडा तोड़ना  रेप की कोशिश की कैटेगरी में नहीं आ रहा है जज साहब के हिसाब से , मौन शब्दों में महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी जजों को यही कहना चाह रही थी कि अपनी आत्मा को मत बेचना

जज साहब के घर में आग लग गई खबरों के हिसाब से 15 करोड़ रु मिले कार्यवाही में जज साहब का रिटर्न तबादला कर दिया जाता है कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होती है, महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी अपने मौन शब्दों से जजों को यही समझाना चाहती थी कि अपनी आत्मा मत बेच देना बड़े बड़े लोग तो पैसा पावर के दम पर निकल जाएंगे मगर गरीब मजबूर लोग कैसे निकलेंगे वो पिस जाएंगे उनका भी ख्याल रखना

देश में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है लोगो में समझ विकसित हो रही है समाज पहले के जैसा नहीं रहा है अब तो बिना विवाह किए हुए भी लोग साथ रहते है इस हिसाब से महिलाओं के रेप जैसे हादसे रुक जाने चाहिए या होने ही नहीं चाहिए इस लिए हमें ज्यादा जेल बनाने की जरूरत नहीं है लोगो को समय पर इंसाफ दो मामला सेटल करो और सरकार बोझ कम करो , महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी अपने मौन शब्दों में जजों को यही समझाना चाह रही थी

देश भर में करोड़ों केस पेंडिग पड़े हुए है उनका निपटारा ही नहीं हो पा रहा है बस तारीख पर तारीख दे दी जाती है तारीख आगे बढ़वाने के लिए पैसा अलग से देना पड़ता है असल में ये बिजनेस की तरह काम हो रहा है लोगो की जिंदगी गुजर जाती है इंसाफ नहीं मिलता है कोई केस 20,25, साल ले ले तो उसे इंसाफ कहा जा सकता है ? महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी अपने मौन शब्दों से जजों को यही समझाना चाहती थी कि लोगो इंसाफ समय पर मिले तब ही इंसाफ कहा जाएगा अन्यथा ये उस व्यक्ति के लिए दूसरी प्रताड़ना साबित होगी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें