शुक्रवार, 28 मार्च 2025

बिजनौर में मुस्लिम ही मुस्लिम को पीटने लगे फ़िरका परस्ती के नाम पर

ये वीडियो बिजनौर का है नमाज पढ़ने के लिए ये जूतम पेजार हुआ हुआ है इसमें चौंकने वाली बात नहीं है नहीं ये कोई हिंदू मुस्लिम दंगा नहीं है ये मुस्लिम की ही दो कास्ट सिया vs सुन्नी ke बीच हुआ है क्योंकि ये लोग एक दूसरे की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकते है अब आप ये मत समझिए कि ये सिया और सुन्नी दो ही कास्ट है दोनों फ़िरको को मिला के ऐसे ही 72 फ़िरके है और सभी का यही हाल है एक दूसरे एक दूसरे की मस्जिद में नमाज पढ़ने नहीं जा सकते है 
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और सुनो इन 72 फ़िरको में जन्नत किसी एक ही फ़िरके को मिलेगी मतलब 71 फिरके बेकार है सबसे बड़ी दुविधा ये है कि इन 72 फ़िरको को ये नहीं पता है कि जन्नत कौन सा फ़िरका जाएगा ? इसलिए हर फ़िरका अपने आप को ऐसे रिप्रेजेंट करता है मानो यही फ़िरका अल्लाह के ज्यादा नजदीक है बस यही कारण है कि अपने आप को ज्यादा नजदीक दिखाने के चक्कर में एक फिरका दूसरे फ़िरको को पेलने में लगा हुआ है

मुस्लिमों में एक समस्या और है वो समस्या है दुनिया के हर आदमी को इस्लाम में कन्वर्ट करवाना और इस्लाम को स्थापित करना और स्लामिक कानून को लाना यही कारण है कि दुनिया के हर कोने में इस्लामिक आतंकवाद से दुनिया परेशान है, और दुनिया वाले ये सोच सोच कर परेशान है कि वो लोग शांति के इस्लामिक मजहब अपना भी लें तो भी वो शांति से जी सकते है क्या ? 
इस से भी मजेदार बात सुनिए , 1947 में भारत के दो टुकड़े हुए किस लिए ? , की मुस्लिम और हिंदू साथ नहीं रह सकते बंटवारे की वजह नफरत बनी मुस्लिम इस्लामिक कानून चाहता था  हिंदू इतनी नफरत नहीं करता है क्योंकि हिंदू अपने देश का एक टुकड़ा देकर अपने रास्ते पर निकल गया अपने देश को तरक्की के रास्ते पर लेकर गया आज 4.3 ट्रिलियन की इकोनॉमी है 

इस्लामिक कानून और इस्लाम के नाम पर बना पाकिस्तान दो दशक में ही टूटकर दो हिस्सों में बट गया इस्लाम के नाम बना देश इस्लामिक लोगो को मिला कर भी एक साथ नहीं रह पाए क्योंकि पाकिस्तान जैसे देश की बुनियाद ही खोखली और झुठी थी इस्लाम के नाम पर भारत का एक टुकड़ा तो ले लिया मगर ये लोग इस्लाम के नाम पर ही एक दूसरे का गला काटने लगे एक दूसरे की बहन बेटियों का बलात्कार करने लगे पूर्वी पाकिस्तान आज का बांग्लादेश 70 के दशक में ही समझ गया था ये इस्लाम के नाम का चूर्ण मूर्ख बनाने के लिए था 
78 साल के बाद भी पाकिस्तान में आजतक इस्लामिक निजाम नहीं है भले ही इन लोगों ने पाकिस्तान को इस्लामिक देश घोषित कर दिया हो मगर आज भी वहां पर लचीला इस्लाम चलता है असली इस्लामिक निजाम अफगानिस्तान में चलता है पाकिस्तान तो अपने देश के लोगों को मूर्ख बनाता है तालिबान के आने से पहले पाकिस्तान चाहता था अफगानिस्तान में स्लामिक शासन आए वहां की महिलाएं बुर्के में नजर आए लड़कियों की पढ़ाई लिखाई बंद करवा दी जाए महिलाओं को नौकरी करने की इजाजत न दी जाए

जब अमेरिका गया तो अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू कर दिया गया अब महिलाए पढ़ लिख नहीं सकती जोर से हस नहीं सकती नौकरी नहीं कर सकती ब्यूटीपार्लर नहीं चला सकती टीवी सीरियल और टीवी चैनलों पर काम नहीं कर सकती मतलब पूरा अफगानिस्तान 7वी सेंचुरी में चला गया है वहीं तालिबानी सोच से पाकिस्तान में एक संगठन बन TTP तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान इस संगठन ने मुहिम छेड़ रखी है पाकिस्तान में तालिबान वाला कानून लेकर आओ मतलब शरीयत लेकर आओ 

यही कारण है आए दिन पाकिस्तान में कई जगह बम बगैर फूटते रहते है एक पाकिस्तानी दूसरे पाकिस्तानी को पेलने में लगा रहता है अब पाकिस्तानी ऐसे फंस गए है कि एक तरफ खाई है और दूसरे तरफ मौत इन्हें समझ नहीं आ रहा है किसका चुनाव करें अगर पाकिस्तान शरीयत लाता है तो पाकिस्तानी लोग घेर के मारेंगे शरीयत नहीं लाते है तो TTP वाले मरेंगे

ये बात यही खत्म नहीं होती है और आगे सुनो अब पाकिस्तान में बलोच भी उठ खड़ी हुई है अब बलोच कह रहे है पाकिस्तान का कोई इतिहास नहीं है हमारा इतिहास हजारों साल पुराना है हम जिस ट्राइबल से आते है उसकी सभ्यता हजारों साल पुरानी है पूरे पाकिस्तान की जाती जमीन में उसकी आदि जमीन बलोचिस्तान की है मतलब 44 प्रतिशत जमीन बलोच की है ये लोग आबादी में कम है मगर भौगोलिक दृष्टि से ये आदा पाकिस्तान है  हो सकता है एक दो दशक में पाकिस्तान का एक हिस्सा और कट के अलग हो जाए इस्लाम के नाम का चूर्ण 78 साल चाटने के बाद अब वही के लोग कह रहे है बंद करो ये बकवास अब इस्लाम के नाम का चूर्ण बिच नहीं रहा है

हाल ही में पाकिस्तान आर्मी ने अपनी सुरक्षा के लिए चीन से आर्मी बुलवाई है दुनिया में ये पहला ऐसा देश है जिसके बाद दुनिया की टॉप 10 आर्मी में आता है वो अपनी आर्मी की सुरक्षा के लिए दूसरे देश से सुरक्षा मांग कर लाया है और ये सपना देखते है कि गजवा ए हिंद करेंगे जिस तरह के इनके हालत है मुझे लगता है एक दो दशक में कही भगवा ए हिंद न हो जाए

गुरुवार, 27 मार्च 2025

रामजीलाल सुमन ने माफी मांगने से किया इन्कार कहा इस जन्म में तो में माफी मांगूंगा नहीं

रामजी लाल सुमन ने स्पष्ट कह दिया है कि में इस जन्म में  तो माफी नहीं मांगूंगा चलो अच्छा है इसने क्लियर कर दिया है अपना पक्ष 

इसे मारना पीटना सही नहीं है न ही इसके घर में तोड़फोड़ करना ठीक है हमे इसका विरोध करना चाहिए और इस बयान पर आपत्ति दर्ज करवानी चाहिए हो सके तो दो चार FIR भी ठोक देनी चाहिए मारपीट करने से संदेश अच्छा नहीं जाएगा वरना पत्थरबाजी करते शांतिदूत और हम में कोई फर्क नहीं रह जाएगा 

हमे इस बात को समझना होगा आखिर इसने ऐसा बयान दिया क्यों ? इसके पीछे का मुख्य करना है मुस्लिम वोट जो एक मुश्त सपा को मिलता है भाजपा जब चुनाव लड़तीं है तो उसे अपनी गिनती एक से ही शुरू करनी पड़ती है मगर सपा और कांग्रेस की गिनती एक से नहीं शुरू होती है इनकी गिनती सीधी 20 से शुरू होती है 

क्योंकि देश के किसी भी राज्य में मुस्लिमों की जितनी प्रतिशत जनसंख्या है उसी हिसाब से गिनती शुरू होती है मान लो सौ वोट में 20 मुस्लिम वोट है तो बिना सोचे समझे ये 20 वोट उस राज्य के नेता को जाएगा जो भी नेता भाजपा को हरा सकता है जैसे उत्तर प्रदेश में भाजपा को टक्कर देने वाली पार्टी सपा है तो 100 वोट में 20 वोट मुस्लिम का है तो 20 वोट सीधा सपा के पास चला जाएगा , बचे हिंदुओं के 80 वोट तो ये वोट भाजपा को पूरे नहीं जाने वाले है क्योंकि इन 80 वोटो में कुछ यादव समाज से होंगे तो वो भी सपा को जाने की पूरी संभावना बनाते है मगर भाजपा को ये 80 वोट पूरे नहीं मिलने वाले है क्योंकि फिर छोटे मोटे नेता भी खड़े हो जाते है वो वोट काट देते है कुछ अपनी जाति के नेता को देखकर वोट देते है इस वजह से भाजपा की गिनती 1 से ही शुरू होगी क्योंकि हिंदू संगठित नहीं है 

अगर हिंदू संगठित हो जाए और 50 प्रतिशत भी एक मुश्त भाजपा को वोट दे दे तो देश में बहुत बड़ा परिवर्तन हो जाएगा सनातन धर्म और हमारे वीर योद्धाओं का अपमान करने वालो को सिर्फ मुस्लिम का ही वोट मिले हिंदुओं का न मिले तो ये लोग इस पोजिशन में भी नहीं आ सकते कि मुस्लिम वोट से अपना एक नेता भी बना सके क्योंकि हम आज भी एकजुट हो जाए तो 80 प्रतिशत होते है 20 प्रतिशत से वोट से ये विधान सभा या लोकसभा नहीं जाने वाले है , फिर ये लोग नगर निगम और पंचायत तक का चुनाव नहीं जीत पाएंगे

हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा है और आज भी सीखने का प्रयास नहीं कर रहे है जातियों में मत संप्रदाय में बट गए तो आने वाले भविष्य में हम ऐसे ही मारे जाएंगे जैसे इतिहास में हमारे साथ हुआ क्योंकि हम संगठित नहीं थे जिसका खामियाजा हमने 800 साल तक गुलामी झेल के चुकाई है इसलिए हमें ऐसी जगह बार करना है कि ये लोग सच्चाई को समझ सकें अभी इनके आंखों पर तुष्टिकरण की पट्टी बंधी हुई है

धृतराष्ट्र पुत्र मोह में महाभारत करवा दिया था देश की विपक्ष की पार्टियां मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए देश के हर संसाधन इन्हें ही दे देंगे और खुद देश लुट कर किसी यूरोप कंट्री में निकल जायेगे इस देश में बचेंगे हम जैसे गरीब लोग जिनके पास इतना भी पैसा नहीं होता है कि अपने ही किसी स्टेट में सुविधा जनक यात्रा करनी हो ठीक ठाक बस या ac ट्रेन में भी सफर कर पाए 

खुद का  और अपने बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल देखना चाहते हो तो अगली बार वोट सोच समझ कर देना आपका वोट ही तय करेगा आपका घर आपकी जमीन आपकी रहेगी या वक्फ बोर्ड की संपति मानी जाएगी 

जय श्री राम 🙏 

मंगलवार, 25 मार्च 2025

फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर फ्रीडम का गलत इस्तेमाल करता वामपंथी कुनाल कामरा

मिलिए इनसे नाम है कुनाल कामरा इनका पेशा  जोकरगिरि करना है मतलब ये लोगो को हसने का काम करते है अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इन्होंने पहले तो अंबानी का मजाक उड़ाया उसके बाद उसके बेटे अनंत अंबानी का मजाक उड़ाया उसके बाद अनन्त अंबानी की बहू राधिका का मजाक उड़ाया ये यही नहीं रुके इसने अनंत अंबानी को हाथी जानवर तक कहा

फिर इसने ओला इलेक्ट्रिक के मालिक भाविश अग्रवाल मजाक ये कह कर उड़ाया कि ओला की गाड़ी तो जल जा रही है जिस व्यक्ति में इतना बड़ा एम्पायर खड़ा कर दिया उसे ट्विटर ट्रॉल कर रहा था इसकी नीचता यही नहीं रुकी फिर इसने आनन्द महिंद्रा का मजाक उड़ाया  भारतीय समाज को कामचोर और निकम्मा बताया बोला ये महिलाओं का उत्पीड़न करते है 

देश के उद्योग जगत का भी ये कह कर मजाक उड़ाया कि इन्होंने आजतक कोई चीज नहीं बनाई इसे सब कुछ इन दस वर्षों में ही चाहिए था कांग्रेस के शासन काल पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया असल में ये कटाक्ष नहीं कर रहा था  ये इसके अपने विचार थे ये कटाक्ष करता तो सभी राजनीतिक दलों पर कटाक्ष करता मगर नहीं इसे तो अपनी फ्रस्ट्रेशन निकालनी थी

फिर इसने टाइम मशीन को लेकर कहा कि हमें टाइम मशीन से यात्रा करने का मौका मिले तो हम 70 के दशक में जाने का प्रयास करेंगे जब मोदी चाय बेचता था तब में जाकर बोलूंगा कि बहन**द ये कैसी चाय बनाई है नीचता में इतने नीचे गिरता गया कि इसने शिवसेना के नेता  एकनाथ शिंदे के काम को लेकर ट्रॉल किया बोला एक रिक्शा चालक उसने तो दूसरों के बाप को ही अपना बाप बना लिया मतलब चुरा लिया

इसने इतने लोगों को ट्रॉल किया फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर यही एक वजह थी कि शिंदे के समर्थक भड़क गए जिस स्टूडियो में ये व्यंग्यात्मक के नाम पर नंगा नाच चला रहा था उसमें तोड़ फोड़ करना शुरू कर दिया कई जगह पर इसपर FIR भी दर्ज कराई गई इस वामपंथी को लेकर सभी लेफ्टिस और लेफ्ट के नेता समर्थन में उतर आए और बोलने लगे ये फ्रीडम और स्पीच है तोड़ फोड़ नहीं करनी चाहिए थी उस पर FIR नहीं करनी चाहिए थी

ऐसा ही एक किस्सा है मराठी अभिनेत्री केतकी चितले का जिसे  2022 में शरद पवार की आलोचना करने वाली एक कविता सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

 40 दिनों से ज़्यादा जेल में रखा 22 एफआईआर दर्ज की गई आईटी एक्ट 2000 की धारा 66ए को लगा दिया गया। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तब उन्हें 104 डिग्री बुखार था 

और उन्हें कपड़े भी नहीं पहने दिए गए  पुलिस हिरासत में भी उनके बाल खींचने की और उन्हें मारने की कोशिश की गई

 लेकिन लिबरल गैंग ने कभी भी उनकी “अभिव्यक्ति की आज़ादी” के बारे में ट्वीट नहीं किया।

सोमवार, 24 मार्च 2025

चंद पैसे के लिए समाज में लोगों के प्रति खत्म होती संवेदना और लोगो की नीचता

लोगो की मानसिकता कितनी विक्षिप्त हो चुकी है कि एक व्यक्ति जिसकी जान चली गई और देश का युवा युवती ड्रम को लेकर रील बना रहा है उन्हें उस व्यक्ति से कोई हमदर्दी नहीं है मगर इन विक्षिप्त लोगों को रील बनाने का कंटेंट जरूर मिल गया है 

संवेदना लोगो की मर चुकी है शास्त्रों में इसे ही कमीनापन कहा गया है लोग ऐसे शोक में भी उस मरे हुए व्यक्ति का अपनी कलाकारी से उपहास उड़ा रहे है ये लोग खुद को कितना भी बड़ा कलाकार कहे मगर ये लोग बौद्धिक स्तर से बिल्कुल खाली लोग है इनके पास न तो अपना विवेक है न ही समझ है 

एक व्यक्ति अपनी जान देकर भी इन्हें सस्ती कॉमेडी कर के दो वक्त की रोटी कमाने का मटेरियल दे कर चला गया है ताकि ये लोग फूहड़ वीडियो बना कर अपनी रील से दो रु एक्स्ट्रा कमा ले ये लोग ऐसा कर के खुद का ही मजाक बना रहे है क्योंकि इस से तुम्हारे बौद्धिक स्तर का जो पतन हुआ है वो स्पष्ट नजर आता है 

हम लोग सामाजिक प्राणी है एक दूसरे के सुख दुख में साथ होते है किसी की मृत्यु का ऐसा मजाक उड़ाना निंदनीय माना गया है , समाज के गिरते स्तर को हम सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रदर्शित कर रहे है उस से हम खुद से ही खुद को नंगा कर रहे है हो सकता है ऐसी मार्मिक घटनाओं पर रील बना कर वायरल कर के दो चार रु कमा लो मगर असल जीवन में हम वो सब खोते जा रहे है जो मानव मूल्यों के लिए आवश्यक है जो है संवेदनशीलता, 

शुभ रात्रि 🙏

हिंदुओं को खुद अपने अंदर झांक कर देखना होगा उसका दुश्मन कौन है

आखिर मियां अखिलेश की ऐसी क्या मजबूरी है कि एक लुटेरे दरिंदे बलात्कारी वहशी दुर्दांत हिंदुओं का हत्यारा औरंगजेब जिसके लिए इनके सीने में दूध उतर आया है जो काम सैकड़ों वर्षों में मुस्लिम आक्रांता नहीं कर पाए वो काम अब मात्र वोट पाने के लिए तथाकथित हिंदू करना चाहते है 

हिंदू समाज अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है जैसे अभी हाल ही में हमने महाकुंभ में देखा न किसी ने जाति देखी न किसी ने ऊंच नीच देखी सारे लोग एक ही घाट पर आस्था की डुबकी लगा कर हिंदू एकता का संदेश दे रहे थे सनातनी जिस आस्था से महाकुंभ में दिखाई दिए उस से संदेश स्पष्ट था अब हिंदू जातियों में नहीं बांटेगा वामपंथियों के चक्रव्यूह से बाहर निकलेगा इनकी व्यूह रचना में नहीं फसेगा

यही कारण है कि हिंदुओं की एकता को देखते हुए देश के वो लोग परेशान हो गए जो समाज को जातियों में विभाजित कर के अपनी रोजी रोटी का इंतजाम करते है ये हिंदू समाज को बांट कर ही फल फूल रहे है हिंदुओं का एक होना इन्हें रास नहीं आ रहा है हम सब देख रहे है ये लोग किस तरह से हम हम हिंदुओं की आस्था पर प्रहार कर रहे थे

हम सबने देखा सनातन धर्म विरोध इतना मुस्लिमों ने नहीं किया जितना हिंदुओं ने किया आप को क्या लगता है जिन लोगों के हिंदू नाम है वो लोग सनातन धर्म को अपमानित कर रहे है वो लोग सच में हिन्दू होंगे ? जो लोग हिंदू समाज को फिर से जातियों में बाँट कर फिर से हजार साल पीछे ले जाना चाहते है वो लोग हिंदू होंगे ? या समाज के शुभ चिंतक होंगे ?

हम हिंदुओं का दुश्मन कोई और नहीं है हमारे दुश्मन हमारे अपने ही लोग है जो लोभ लालच में पड़ कर एक विशेष समाज को साधने के चक्कर में हमे भ्रमित कर रहे है हमे लगता है ये हमारे शुभ चिंतक है मगर ऐसा है नहीं क्योंकि ये लोग आस्तीन के सांप है इन्हें वक्त रहते पहचान को कही पहचानने में हमे देर न हो जाए 

सत्ता का पावर होता ही कुछ ऐसा की अपने भी धोखेबाज हो सकते है किसी ने सच ही कहा था किसी की औकात देखनी हो तो उसे पावर या पैसा दे दो उसके बाद उसका चाल चलन देखो बिल्कुल बदल जाएगा जो लोग पावर और पैसे से रत्ती भर भी बदलते नहीं है असली लोग वहीं होते है उनका दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट होता है कि ये सब तो धूप छांव की तरह है आती और जाती रहेगी मगर चरित्र एक बार खराब हो गया तो जीवन में कभी भी उसे अर्जित नहीं किया जा सकेगा

 दोस्तो और दुश्मनों पर फर्क करना सीखिए महाभारत  के अर्जुन बनना पड़े तो हिचकिचाना नहीं है कि युद्ध में हम किसके सामने खड़े है धर्म की स्थापना के लिए अपने से भी लड़ना पड़े तो परेशान नहीं होना है  जीत हमेशा सत्य की होती है सत्य के लिए धर्म के लिए जीवन भी चला जाए तो इतिहास तुम्हें कभी कायर नहीं कहेगा तुम्हे सम्मान देगा  वो भी बिना हिचकिचाहट के

जय श्री राम 🙏

शनिवार, 22 मार्च 2025

जज यशवंत वर्मा के घर का वीडियो आया सामने करोड़ों रु जल हुए खाक

सुप्रीम कोर्ट कह रहा था कोई पैसा नहीं मिला सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है हफ्ते भर पहले आग लगी उसकी रिपोर्ट हफ्ते भर आई की हमे कोई पैसा नहीं मिला है इसमें फायर ब्रिगेड बालों का दोष नहीं है न्याय पालिका सबसे ज्यादा पावर होल्ड करती है बेचारे कर्मचारियों को धमकाया होगा 

अब तो वीडियो भी रिलीज हो गया अब जज साहब कैसे इसे साजिश बता सकते है एक कमरे में पैसा ही पैसा भरा पड़ा हुआ है नोट आदे जल चुके है मतलब किसी काम के नहीं रहे है नोट इतना मिला हुआ था कि उसकी गिनती करने में पूरा एक हफ्ता लगा  

प्रयागराज के वकीलों ने भी जज साहब का दिल्ली हाइ कोर्ट के जज का ट्रांसफर प्रयागराज कोर्ट में करने की वजह से कड़ी प्रतिक्रिया दी थी कि प्रयागराज कोई कूड़ा दान नहीं है जो इन्हें इधर ट्रांसफर किया जा रहा है ऐसे भ्रष्ट जज का ट्रांसफर इधर मत करो इन्हें उधर ही रखो या बर्खास्त करो 

ये जज साहब हमेशा से शक के घेरे में रहे है इन्होंने कई विवादित केस को पलट दिया था कइयों को जमानत तक दे दी थी जिन लोगों पर पुख्ता सबूत तक थे  फिर भी जज साहब ने नियमों की अनदेखी की  थी 

देखा जाए तो जुडिशरी में अंधा करप्शन है जज साहब के खिलाफ कोई कुछ लिख दे तो कोर्ट की अनदेखी का आरोप लगा के जज केस कर के जेल में डाल देते है कोई FIR करवाए या न करवाए खुद से ही संज्ञान लेकर नोटिस भेज देते है 

देश के गरीब और मजबूर लोग सालों साल केस लड़ते रहते है उन्हें सिर्फ तारीख मिलती है न्याय भी दशकों गुजरने के बाद मिलता है इतने लंबे वक्त के बाद इंसाफ मिले तो इसे इंसाफ माना जाएगा ?  भ्रष्टाचारी लोगों को रातों रात जमानत मिल जाती है कैसे ? न्याय पालिका से आम नागरिक को उम्मीद करनी चाहिए या छोड़ देनी चाहिए आज हर आम नागरिक यही जानना चाहता है

लव मैरिज अरेंज मैरिज के कुचक्र में फंसे लोग और जीवन दाव पर

एक दौर था जब अरेंज मैरिज हुआ करती थी एक दूसरे को जानते तक नहीं थे फिर भी जीवन भर साथ निभाते थे , आजकल लोग पहले प्रेम करते है फिर प्रेम विवाह करते है असल में जो विवाह के बाद होना था वो विवाह से पहले ही हो गया विवाह के बाद नया करने को कुछ होता नहीं है 

जब कोई अरेंज मैरिज करता है तो विवाह के बाद बीबी को छूना इतना आसान नहीं होता है क्योंकि एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते नहीं है पता नहीं क्या गलती हो जाए और साथी को बुरा लग जाए  इसलिए बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है अपने साथी से मेल मुलाकात में 

अगर प्रेम विवाह किया है तो विवाह के बाद ये फॉर्मेलिटी करने की आवश्यकता है नहीं सीधे गोद में गिर जाओ कोई हिचकिचाहट नहीं है पहले से ही एक दूसरे को इतना जानते है कि अब जानने की आवश्यकता ही नहीं रह जाती है  और आज ऐसा कुछ विशेष करना भी नहीं है जो पहले न किया हो इस लिए विवाह विवाह जैसा लगता ही नहीं है

अरेंज मैरिज में कई दिन दो एक दूसरे से शर्माने में ही निकल जाते है पहली रात भी खुल कर अपना व्यक्तिव प्रदर्शित नहीं कर सकते इंसान कोशिश करता है उसका व्यक्तिव धीरे धीरे सामने आए हर दिन अपने साथी के बारे में कुछ अच्छा जानने को मिलता है तो अच्छा लगता है नए नए होते है तो एक दूसरे का स्पर्श भी महसूस होता है कि साथी ने छुआ है उस स्पर्श को इंसान अपने जीवन में कभी नहीं भूलता है

इसी लिए अरेंज मैरिज लंबी चलती है क्योंकि एक दूसरे को समझने में ही हम दस बीस साल निकाल देते है जब दस बीस साल निकाल देते है तो एक दूसरे की आदत सी भी हो जाती है एक साथी थोड़ा बहुत क्रूर या हाथ चलाने वाला भी मिल जाए तो बस यही सोच के साथ निभा जाते है कि इतना समय गुजार दिया थोड़ा बहुत और बचा है वो भी गुजर ही जाएगा

जो लोग प्रेम विवाह करते है वो विवाह से पहले ही उस जीवन को ही लेते है जो जीवन एक शादी विवाह के बाद जीना चाहिए इसलिए विवाह के उपरांत वो विवाह विवाह जैसा नहीं रहता है उल्टा ऐसे लोगों को परेशानियां ज्यादा आ घेरती है क्योंकि इन्हें लगता है जीवन जीना प्रेम करने जितना आसान है सम्बन्ध बना लेने जितना आसान है 

इन्हें लगता है विवाह के बाद जो सुख हमे मिल रहा है वो तो हम बिना विवाह के ही ले रहे थे हमे विवाह कर के खुद को इतनी जटिलता में क्यों डालना और ऐसे धीरे धीरे परस्पर एक दूसरे के प्रति प्रेम खत्म होता जाता है और जिम्मेदारियों मुसीबत लगने लगती है तब लगता है विवाह कर के फंस गए फिर यही प्रेमी अपने अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से इतना भागते है कि एक दिन 

प्रेमी दूसरे प्रेमी को 36 टुकड़ों में काट कर फ्रिज में रख देता है कोई 15 टुकड़े कर के तीन एक का मसाला डालकर ड्रम में जमा देता है कोई हाथ पैर काट के सूटकेस में पैक कर के फेंक देता है तो कोई फांसी लगाकर इंसाफ की गुहार लगाता है जो समाज की चिंता नहीं करते है वो साथी को छोड़कर भाग जाते है जो समझदार होते है वो स्वेच्छा से तलाक ले लेते है कुछ लोग साथ तो रहते है मगर उनका जीवन नरक से भी गया गुजारा होता है

लोग अपनी मन मर्जी से शादी करते है फिर भी जीवन भर साथ नहीं दे पाते है और अधर में ही जीवन संकल्प तोड़ देते है आधुनिक होने का या पश्चिम सभ्यता कॉपी करके जीवन जीने का तरीका भारतीय सामाजिक तानाबाना बिखेर रहा है क्योंकि हम पश्चिम की सभ्यता तो अपना रहे है मगर हमें ये भी सोचना चाहिए कि हम लोगों का वो स्तर है क्या जो पश्चिमी लोगो का है  ?

जब महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी ने संविधान दिवस पर जजों से की भावुक करने वाली अपील

27 नवंबर 2022 को महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी ने संविधान दिवस के दिन देश के जजों को संबोधित करते हुए बड़ी ही मार्मिक अपील की थी और लास्ट में कहा था में आप सब पर छोड़ती हूं आप वो भी समझिए जो में कहना नहीं चाहती 

असल में लास्ट में जो महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी ने जो कहा पूरी स्पीच का सार उन्हीं वक्तव्यों में था कुछ न कह कर उन्होंने सब को कुछ कह दिया था ये जो मौन शब्द होते है बड़े ही गहरे होते है इन्हें समझना इतना भी कठिन नहीं है अगर तुमने अपने आत्मा को बेचा न हो तो 

किसी महिला की छाती को स्पर्श करना जबरजस्ती उसे खींच कर पुलिया के नीचे ले जाना फिर उसका नाडा तोड़ना  रेप की कोशिश की कैटेगरी में नहीं आ रहा है जज साहब के हिसाब से , मौन शब्दों में महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी जजों को यही कहना चाह रही थी कि अपनी आत्मा को मत बेचना

जज साहब के घर में आग लग गई खबरों के हिसाब से 15 करोड़ रु मिले कार्यवाही में जज साहब का रिटर्न तबादला कर दिया जाता है कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होती है, महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी अपने मौन शब्दों से जजों को यही समझाना चाहती थी कि अपनी आत्मा मत बेच देना बड़े बड़े लोग तो पैसा पावर के दम पर निकल जाएंगे मगर गरीब मजबूर लोग कैसे निकलेंगे वो पिस जाएंगे उनका भी ख्याल रखना

देश में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है लोगो में समझ विकसित हो रही है समाज पहले के जैसा नहीं रहा है अब तो बिना विवाह किए हुए भी लोग साथ रहते है इस हिसाब से महिलाओं के रेप जैसे हादसे रुक जाने चाहिए या होने ही नहीं चाहिए इस लिए हमें ज्यादा जेल बनाने की जरूरत नहीं है लोगो को समय पर इंसाफ दो मामला सेटल करो और सरकार बोझ कम करो , महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी अपने मौन शब्दों में जजों को यही समझाना चाह रही थी

देश भर में करोड़ों केस पेंडिग पड़े हुए है उनका निपटारा ही नहीं हो पा रहा है बस तारीख पर तारीख दे दी जाती है तारीख आगे बढ़वाने के लिए पैसा अलग से देना पड़ता है असल में ये बिजनेस की तरह काम हो रहा है लोगो की जिंदगी गुजर जाती है इंसाफ नहीं मिलता है कोई केस 20,25, साल ले ले तो उसे इंसाफ कहा जा सकता है ? महा महिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी अपने मौन शब्दों से जजों को यही समझाना चाहती थी कि लोगो इंसाफ समय पर मिले तब ही इंसाफ कहा जाएगा अन्यथा ये उस व्यक्ति के लिए दूसरी प्रताड़ना साबित होगी

गुरुवार, 20 मार्च 2025

मुस्लिमों द्वारा नागपुर हिंसा हिंदुओं का बचाव में कुछ न करना

नागपुर में हिंदुओं को इस बात से शिकायत थी कि पुलिस को फोन किया तो दो घंटे बाद 

जिस शहर की आबादी में 70 प्रतिशत हिन्दू थे वहां 12 से 15 प्रतिशत वाले शांतिदूतों से पत्थर खाते रहे अपनी संपतियों का नुकसान करवाते रहे 25 हजार 1 लाख के फोन से वीडियो बनाते रहे सुरक्षा के लिए जो वीडियो कैमरे लगवाए थे उन्हें भी उखाड़ के फेंक दिया गया 

लाखों रु की गाड़ी ले ली थी कि दुनिया को दिखाऊंगा हमने जीवन में क्या अर्जित किया है करोड़ों रु का मकान बनवाया ताकि दुनिया को दिखा सके अपना कितना भौकाल है देखो मेरी लाइफ स्टाइल हम ऐसे राजे महाराजा की तरह अपना जीवन यापन करते है  

जमीन और संपतियों का ज्यादा बटवारा न हो इस लिए एक से दो ही बच्चे पैदा किए ताकि परिवार ही बोझ न बने खुद आधुनिकवादी होने की चेष्टा करते रहे मगर खुद को सुरक्षित रखने के लिए एक तलवार नहीं ले सके छत की मुडेर पर दो चार ईंटे भी नहीं रख सके दस पांच हजार का कोई हथियार भी नहीं रख सके तुम्हारे घर के नीचे भीड़ तांडव करती रही और तुम एक सिलेंडर में आग लगा कर छत से नीचे भी नहीं फेंक सके

ऐसे तो डर डर के तुम अपना जीवन व्यतीत कर रहे हो सोच रहे थे पुलिस को फोन कर देते है पुलिस आकर बचा लेगी जब तुम मरने से इतना डर रहे हो कि अपनी लड़ाई तुम खुद नहीं लड़ सकते तो तुम्हारे लिए पुलिस क्यों अपना जीवन दाव पर लगाए ? उन पुलिस वालों के बच्चे नहीं है क्या ? उन्हें फिकर नहीं हो रही होगी कि उनके बाद उनकी फैमिली का क्या होगा ? 

शायद यही सोच के पुलिस भी लेट आई की मामला रफा दफा हो जाने दो बाद में कार्यवाही कर लेंगे ? अगर तुम लोग खुद उस लड़ाई में कूद गए होते तो शायद पुलिस भी टाइम पर आ जाती और उन्हें भी इस बात की तसल्ली रहती की चलो हम अकेले नहीं है आम जन भी हमारे साथ है तो काबू पाना आसान हो जाएगा ?

असल में हिन्दू समाज इतना ज्यादा स्वार्थी हो गया है कि वो थोड़ा सा भी रिस्क नहीं लेना चाहता है उसे अपनी जान ज्यादा प्यारी है वो अपनी सुरक्षा के लिए भी दूसरों पर आश्रित है इनकी बहन बेटियों को भी कोई उठा ले जाए तो इनका खून नहीं खोलने वाला है सोचेंगे सुबह पुलिस में FIR करवा देंगे ढूंढकर लाना पुलिस की नैतिक जिम्मेदारी है इन लोगों के लिए दूसरे ही जिम्मेदारी निभाएंगे मगर इनकी अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं है 

कुछ लोगों को बुरा लगेगा मगर इसे दवाई समझ कर हजम कर लेना हम तो इतना ही कड़वा लिखेंगे भाई

सोमवार, 17 मार्च 2025

grok AI और उसके अटपटे जवाब उस पर लोगो की प्रतिक्रिया

जब हम किसी को सोशल मीडिया पर ट्रॉल करते है या उसे प्रतिक्रिया देते है तो सामने वाला कहता है कि अलग विचारधारा होने के कारण ये लोग गाली गलौज करते है इंसान होने के नाते हम ऐसा बोल सकते है और आरोप प्रत्यारोप कर के निकल जाते है हम कभी भी खुद का विश्लेषण नहीं करते है कि हम सार्वजनिक रूप में इस आभाषी पटल पर क्या बोल रहे है क्या पढ़ रहे है और उस डेटा को कंजुम करके हम क्या प्रतिक्रिया देते है हम लोग इस विवाद में पड़ते ही नहीं है कि पीछे क्या बोल कर आए है बस सामने जो दिखता है उस पर प्रतिक्रिया देकर आगे निकल जाते है

जब कोई स्वतंत्र AI चैट boat हमारा विश्लेषण करता है उसके बाद प्रतिक्रिया देता है तो हम ये नहीं कह सकते है कि इसकी विचारधारा हमसे अलग है इसलिए हम से ये गाली गलौज कर रहा है असल में वो आप को आईना दिखा रहा है आपका चरित्र कैसा है आप बाते कैसी करते हो, तुम दुष्ट हो मगर भला मानस बनने की बेकार नौटंकी करते हो जब चैट boat ने आईना दिखा दिया तो तुम कहते हो इसको डिजाइन ही इस तरह किया गया है कि ये तुम्हारी बुराई ही करेगा

असल में मानव की यही समस्या है वो गई गुजरी बातों को भूल कर आगे बढ़ जाता है भूली बिसरी यादों को संजोकर नहीं रख पाता है मगर ये इंटरनेट आप के एक एक शब्द को संजोकर रखता है जो कुछ भी इंटरनेट पर एक बार अपलोड हो गया वो कभी मिटता नहीं है आप भले ही अपनी तरफ से डिलीट कर दो मगर वो तब भी इंटरनेट पर रहता ही रहता है यही कारण है कि इस धंधे से जुड़े लोग हर एक इंडिविजुअल पर नजर रखते है कि आप इंटरनेट पर क्या देख रहे हो क्या सर्च कर रहे हो 

फिर उसी हिस्ट्री के हिसाब से आप को एड दिखना शुरू हो जाते है जब कोई भी चीन आप को बार बार दिखेगी तो आप उस पर एक बार क्लिक जरूर करोगे एक बार क्लिक कर के देख लिया तो वो एड आपका पीछा नहीं छोड़ता है जब तक आप उस वस्तु को खरीद नहीं लेते है वो आप को ऐसे ऐसे आकर्षक आकर्षक ऑफर देगा कि आप उसे खरीद ही लोगे भले ही आप को कोई जरूरत न हो उस सामान की

ट्विटर पर ऐसे ही एक AI टूल है जिसका नाम @grok है जो आप की प्रतिक्रिया का विश्लेषण करता है जब आप उस से किसी विषय में पुछते है तब वो आप की पिछले रिकॉर्ड के हिसाब से आप को जवाब देता है जिसमें वो आप को गाली गलौज भी करता है और आप उसका विरोध भी नहीं कर सकते क्योंकि वो एक चैट boat है आप जिस भाषा शैली का प्रयोग करते है वो उसी हिसाब से आप को प्रतिक्रिया देता है उसमें कोई फिल्टर नहीं है कि उसे डिसेंट ही बात करनी है आप उसकी गांव में उंगली करोगे तो वो आप की गांव में हाथ डाल देगा और आप को आपकी औकात दिखा देगा 

ऐसी ही कुछ प्रतिक्रियाएं grok AI ने लोगो को दी है जिसकी कुछ तस्वीर आप सब को शेयर कर रहा हूं आप भी इन प्रतिक्रियाओं का मजा लीजिए औरों को भी लेने दीजिए

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

तेज आंधियां और अंधकार से धुंधले हुए शहर

तेज आंधियां और अंधकार से धुंधले हुए शहर
यहाँ सब अजनबी है किसी को न किसी की खबर

एक उदासी आंखों में  न मुस्कराहटें चेहरों पर
गांव बाले आये तो देखे कैसे होते है ये शहर

आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित 
फिर भी गुनाह रोकने में कितने बेबस है शहर

कैमरों से अच्छी है हमारे गांव के बुजुर्गों की नजर
उनके सामने भरते है पानी तुम्हारे ये आधुनिक शहर

उड़ती हुई धूल ने छीन ली है खूबसूरती पेड़ो की
दौड़ती हुई गाड़ियों के धुएं ने झुलसा दिए है शहर

दूध से लेकर पानी तक पन्नियों में बेचे जा रहे है
सुख की चाहत में दर्द का अंबार ओढ़ रहे है शहर

शनिवार, 11 जुलाई 2020

ये जरूरी नही है कि हर गुनाह की सजा मिले

ये जरूरी नही है कि हर गुनाह की सजा मिले
कुछ  बातें में भी रख लू इतना तो समय मिले

जज बन के फैसला कर दो ये कहा तक ठीक है
सजा पहले ये हक है मेरा,मुझे भी एक मौका मिले

हो सकता है मुझे समझने में तुम से कही भूल हुई हो
ऐसे कौन सजा देता है, जिस से तुम्हारा मन न मिले

शक के दायरे में लाखों जिंदगियां हो जाती है तबाह
दुआ करो ऊपर बाले से ऐसा भाग्य किसी को न मिले

मेने देखी है बदकिस्मती को, अपनी हस्तरेखाओं में
सब छूटता ही जा रहा है,पता नही दोबारा मिले न मिलें

ये भी एक दौर है वो भी एक दौर था

ये भी एक दौर है वो भी एक दौर था
मंजिल तो पास थी रास्ता ही दूर था

देखती रहती थी जिनको आंखे दूर से
उन्हें निहारने का मजा ही कुछ और था

अब अपनी गिनती होने लगी है औरों में
अपना कहने का वो दौर ही और  था

न जाने कब पासे पलट गए जिंदगी के
एक दिन जुदा होना भी शायद तय था

चलो अब रास्ते बदल लेते है हम दोनो
जो भी हुआ उसका तुम्हे क्या मलाल था

मंगलवार, 15 अक्टूबर 2019

छोटी सी जिंदगी में बस छोटे से गम है

छोटी सी जिंदगी में बस छोटे से गम है
तेरी इस महफ़िल में एक हम ही नही है

उड़ते हुए बदलो से पूंछता हु में तेरा पता
वो भी कहते है तेरी कोई खैर खबर नही है

चाहो तो पूंछ लेना इन हवाओं से मेरा पता
मुझे ढूढ़ लेना भी इतना मुश्किल नही है

कोई खता हुई है तो बताने में कोई बुराई नही है
तुम रूठ जाओ ये आदत तुम्हारी नही है

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

सियासत के गलियारों में ,कोलाहल बड़ा भारी है

सियासत के गलियारों में,कोलाहल बड़ा भारी है
वोट की खातिर कुछ लोगो ने,देश से की गद्दारी हैं

चुनाव पर्व है लोकतंत्र का,सबकी अपनी तैयारी है
जो साध ले जन भावना, वो ही बड़ा व्यापारी है

जो सब की बात करेगा  उस से अपनी यारी है
लोकतंत्र के महा पर्व में जनता सब पर भारी है

किसने लुटा देश हमारा किसकी ये मक्कारी है
चाहे जितना देश लूटलो ये भूंख न मिटने बाली है

क्यो शक किया सेना पर जिसके हिस्से रखबाली है
काम करे कुछ ऐसा जिसमे सब की खुशहाली है

बुधवार, 3 अप्रैल 2019

न बांटो इस देश को हम पर ये अहसान रहने दो

न बांटो देश को हम पर ये अहसान रहने दो
अनेकता में एकता का बस एहसास रहने दो

जहाँ जान न्यौछावर करते हो देश पर सैनिक
उन सैनिकों का हौसला आसमान पर रहने दो

बहुत पुराना हुआ ये गरीबी हटाने का नाटक
अब में गरीबी में खुश हूं मुझे गरीब ही रहने दो

माना भूंख तोड़ देती है अच्छे अच्छो का हौसला
फिर हम टूटेंगे नही हमे बस आत्मनिर्भर रहने दो

हमे नही चाहिए स्वपनों का अमेरिका और पेरिस
मेरे हिंदुस्तान को तुम बस हिंदुस्तान ही रहने दो

सोमवार, 18 मार्च 2019

हम तुम्हे भूल जाँए ये मेरी फितरत नही है

हम तुम्हे भूल जाँए ये मेरी फितरत नही है
तुम हमको चाहो ये कोई जरूरी तो नही है

किसी की याद में उम्र काट देना ही प्रेम है
उम्र भर हम साथ रहे ये जरूरी तो नही है

मिल ही जाते हो तुम मेरे ख्यालो में अक्सर
हकीकत में मिलें  हम  ये जरूरी तो नही है

टूट  पड़ता है मुझ   पर तुम्हारी  यादों  दरिया
में भी तुम्हे याद आऊं ये कोई जरूरी तो नही है

रातो में देखे है हमने ये खामोश रातो के तारे
हर रोज चांद निकले ये कोई जरूरी तो नही है

शुक्रवार, 15 मार्च 2019

मंजिल तक पहुचना काफी नही ऐ जिंदगी

मंजिल तक पहुचना काफी नही ऐ ज़िंदगी
सफर के भी कुछ मायने निकलने चाहिए

बहुत उड़ते रहे है दुश्मनी के काले बादल
अब तो मोहब्बत के बादल बरसने चाहिए

क्यों देखते हो यूं शक की निगाहों से हमको
देर से ही सही मगर ये नजरिये बदलने चाहिए

मेरे हृदय में रहोंगे तुम हमेशा धड़कन बन कर
जब नाम लू में तेरा तो दिल धड़कना चाहिए

हर किसी को हक़ है प्यार करने का दोस्तो
जरूरी नही है कि दिल से दिल मिलना चाहिए

शनिवार, 9 मार्च 2019

काश तुमने अपनी कातिल निगाहों से देखा न होता

काश तुमने मुझे अपनी कातिल निगाहों से देखा न होता
तो में तुम्हारी मोहब्बत में इतना गिरा न होता

बुझा ही रहने देती तुम अपने मोहब्बत के चिराग को
कम से कम शमा की आग में परवाना जला तो न होता

में मानता हूं कुछ रिश्ता नही है तेरे मेरे दरम्यां में
फिर भी मेरी चाहत का एहसास तो किया होता

बड़ी ख्वाहिश रही मेरी तुम्हे जी भर देखे कभी
काश मेरा ये सपना कभी पूरा तो हुआ होता

बड़ी तकलीफे देती है गुजरी हुई यादें तुम्हारी
काश में तन्हा ही सही उम्र भर के लिए सोया ही हुआ होता

सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

कहा भूलता है वो तुम्हारा मध्धम सा मुस्कराना

कहा भूलता है वो तुम्हारा मध्धम सा मुस्कराना
वो प्यारी सी नजरे झुका के हल्का सा सरमाना

एक मुद्दत बीत गई खोए ख्यालातों में तुम्हारे
काश लौट आये वो बचपन का गुजरा जमाना

कुछ न कुछ तो बांकी रह गया है तेरे मेरे दरम्यां
यूँही ही नही जलता है आग में मुझ सा परवाना

भले ही हो तुम्हारे पास हमे भूलने हजारों बहाने
में तो रखता हूं पास तुम्हारी यादों का खजाना